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राम सुना दुखु कान न काऊ। जीवनतरु जिमि जोगवइ राऊ॥ पलक नयन फनि मनि जेहि भाँती। जोगवहिं जननि सकल दिन राती॥ ते अब फिरत बिपिन पदचारी। कंद मूल फल फूल अहारी॥ धिग कैकेई अमंगल मूला। भइसि…