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हिन्दू धर्म के अनुसार विष्णु परमेश्वर के तीन मुख्य रूपों में से एक रूप हैं। पुराणों में त्रिमूर्ति विष्णु को विश्व का पालनहार कहा गया है। त्रिमूर्ति के अन्य दो भगवान शिव और…
गणेश शिवजी और पार्वती के पुत्र हैं। उनका वाहन मूषक है। गणों के स्वामी होने के कारण उनका एक नाम गणपति भी है। ज्योतिष में इनको केतु का देवता माना जाता है, और जो भी संसार के साधन…
शैलपुत्री देवी दुर्गा के नौ रूप होते हैं। दुर्गाजी पहले स्वरूप में 'शैलपुत्री' के नाम से जानी जाती हैं। ये ही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में…
तर्ज( उड़े जब जब) मेरा श्याम बड़ा रंगीला, मस्तियाँ बरसेगी-2, कीर्तन में, रंगीलो मेरा बाबो श्याम ।। टेर ।। कोई श्याम को रिझाकर देखे, उमरिया सुधरेगी-2, कीर्तन में ।। 1 ।। कोई श्याम को…
!! श्री मोर्वी नन्दन श्याम चालीसा !! स्कन्द महापुराण पर आधारित दोहा :- श्री गुरु पदरज शीशधर प्रथम सुमिरू गणेश ॥ ध्यान शारदा ह्रदयधर भजुँ भवानी महेश ॥ ... चरण शरण विप्लव पड़े हनुमत…
महाबली भीम और हिडिम्बा के पुत्र वीर घटोत्कच ने शास्त्रार्थ प्रतियोगिता जीतकर राजा मूर की पुत्री, कामकटंकटा (“मौर्वी”) से विवाह किया| उन्होंने एक वीर पुत्र को जन्म दिया जिसके केश…
आना खाटू श्याम हमारे मन मंदिर में पाप को हटाना प्रभु क्रोध को हटाना सत्य की पौध लगाना हमारे मन मंदिर में आना खाटू श्याम ............... अहंकार को खोना प्रभु प्रेम को बोना शीतल…
खाटू वाले श्याम बाबा तेरा ही सहारा-1 तेरे सिवा दुनिया में कोई न हमारा – 11 लाख्दातर तू हैं एक जाने जग सारा -1 खाटू वाले श्याम बाबा तेरा ही सहारा –11 बड़े ही दयालु …… तेरी महिमा है…
अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम्। हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥१॥ वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम्। चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं…
श्रीगोविन्दाष्टकं रचना: आदि शङ्कराचार्य सत्यं ज्ञानमनन्तं नित्यमनाकाशं परमाकाशम् । गोष्ठप्राङ्गणरिङ्खणलोलमनायासं परमायासम् । मायाकल्पितनानाकारमनाकारं भुवनाकारम् । क्ष्मामानाथमनाथं…
देव्युवाच देवदेव! महादेव! त्रिकालज्ञ! महेश्वर! करुणाकर देवेश! भक्तानुग्रहकारक! ॥ अष्टोत्तर शतं लक्ष्म्याः श्रोतुमिच्छामि तत्त्वतः ॥ ईश्वर उवाच देवि! साधु महाभागे महाभाग्य…
देवि! सुरेश्वरि! भगवति! गङ्गे त्रिभुवनतारिणि तरलतरङ्गे । शङ्करमौलिविहारिणि विमले मम मतिरास्तां तव पदकमले ॥ 1 ॥ भागीरथिसुखदायिनि मातस्तव जलमहिमा निगमे ख्यातः । नाहं जाने तव महिमानं…
त्रिदलंत्रिगुणाकारंत्रिनेत्रंच त्रियायुधं त्रिजन्मपापसंहारम्एकबिल्वंशिवार्पणं त्रिशाखैःबिल्वपत्रैश्चअच्चिद्रैःकोमलैःशुभैः तवपूजांकरिष्यामिएकबिल्वंशिवार्पणं कोटि कन्या महादानं…
नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौंदर्यरत्नाकरी। निर्धूताखिल-घोरपावनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरी। प्रालेयाचल-वंशपावनकरी काशीपुराधीश्वरी। भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपुर्णेश्वरी।।…
त्रिलोक्य विजयस्थ कवचस्य शिव ऋषि , अनुष्टुप छन्दः, आद्य काली देवता, माया बीजं, रमा कीलकम , काम्य सिद्धि विनियोगः || १ || ह्रीं आद्य मे शिरः पातु श्रीं काली वदन ममं, हृदयं क्रीं…
अंग हरे पुलकभूषणमाश्रयंती , भृंगागनेव मुकुलाभरणं तमालम | अंगीकृताखिलविभूतिर पांग लीला, मांगल्यदास्तु मम मंगदेवताया || १ || मुग्धा मुहुर्विदधाति वदने मुरारेः…
नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते | शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते || नमस्ते गरुडारुढे कोलासूरभयंकरी | सर्वपापहरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते || सर्वज्ञे सर्ववरदे…
विनियोग: ॐ अस्य श्रीसदा -शिव -प्रासाद -मन्त्र -कवचस्य श्रीवामदेव ऋषिः , पंक्ति छंद, श्रीसदा-शिव देवता, अभीष्ट -सिद्ध्यर्थे पाठे विनियोगः | ऋषादि न्यास: श्रीवामदेव -ऋषये नमः शिरसी…
नागेन्द्र हाराय त्रिलोचनाय, भस्मांगरागाय महेश्वराय | नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय,तस्मै 'न' काराय नमः शिवाय ||१|| मन्दाकिनी सलिलचन्दनचर्चिताय ,नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय |…
जटाटवीग लज्जलप्रवाहपावितस्थले गलेऽवलम्ब्यलम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्। डमड्डमड्डमड्डम न्निनादवड्डमर्वयं चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥ सघन जटामंडल रूप वन से प्रवाहित होकर…