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एक बार जननीं अन्हवाए। करि सिंगार पलनाँ पौढ़ाए॥ निज कुल इष्टदेव भगवाना। पूजा हेतु कीन्ह अस्नाना॥ करि पूजा नैबेद्य चढ़ावा। आपु गई जहँ पाक बनावा॥ बहुरि मातु तहवाँ चलि आई। भोजन करत…