विषय
कृपासिंधु बोले मुसुकाई। सोइ करु जेंहि तव नाव न जाई॥ वेगि आनु जल पाय पखारू। होत बिलंबु उतारहि पारू॥ जासु नाम सुमरत एक बारा। उतरहिं नर भवसिंधु अपारा॥ सोइ कृपालु केवटहि निहोरा। जेहिं…