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आरति श्रीरामायनजी की। कीरति कलित ललित सिय पी की॥ गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद। बालमीक बिग्यान-बिसारद॥ सुक सनकादि सेष अरु सारद। बरनि पवनसुत कीरति नीकी॥१॥ गावत बेद पुरान अष्टदस। छहो…
श्री गणेशाय नमः श्रीजानकीवल्लभो विजयते श्रीरामचरितमानस सप्तम सोपान (उत्तरकाण्ड) श्लोक केकीकण्ठाभनीलं सुरवरविलसद्विप्रपादाब्जचिह्नं शोभाढ्यं पीतवस्त्रं सरसिजनयनं सर्वदा…
श्री गणेशाय नमः श्री जानकीवल्लभो विजयते श्री रामचरितमानस षष्ठ सोपान (लंकाकाण्ड) श्लोक रामं कामारिसेव्यं भवभयहरणं कालमत्तेभसिंहं योगीन्द्रं ज्ञानगम्यं गुणनिधिमजितं निर्गुणं…
श्रीजानकीवल्लभो विजयते श्रीरामचरितमानस पञ्चम सोपान सुन्दरकाण्ड श्लोक शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम् । रामाख्यं…
http://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/9/91/The_Signet_Ring.jpg श्रीगणेशाय नमः श्रीजानकीवल्लभो विजयते श्रीरामचरितमानस चतुर्थ सोपान (किष्किन्धाकाण्ड) श्लोक…
श्री गणेशाय नमः श्री जानकीवल्लभो विजयते श्री रामचरितमानस - तृतीय सोपान (अरण्यकाण्ड) श्लोक मूलं धर्मतरोर्विवेकजलधेः पूर्णेन्दुमानन्ददं वैराग्याम्बुजभास्करं ह्यघघनध्वान्तापहं…
राम सुना दुखु कान न काऊ। जीवनतरु जिमि जोगवइ राऊ॥ पलक नयन फनि मनि जेहि भाँती। जोगवहिं जननि सकल दिन राती॥ ते अब फिरत बिपिन पदचारी। कंद मूल फल फूल अहारी॥ धिग कैकेई अमंगल मूला। भइसि…
कृपासिंधु बोले मुसुकाई। सोइ करु जेंहि तव नाव न जाई॥ वेगि आनु जल पाय पखारू। होत बिलंबु उतारहि पारू॥ जासु नाम सुमरत एक बारा। उतरहिं नर भवसिंधु अपारा॥ सोइ कृपालु केवटहि निहोरा। जेहिं…
श्रीगणेशायनमः श्रीजानकीवल्लभो विजयते श्रीरामचरितमानस द्वितीय सोपान अयोध्या-काण्ड श्लोक- यस्याङ्के च विभाति भूधरसुता देवापगा मस्तके भाले बालविधुर्गले च गरलं यस्योरसि व्यालराट्।…
एक बार जननीं अन्हवाए। करि सिंगार पलनाँ पौढ़ाए॥ निज कुल इष्टदेव भगवाना। पूजा हेतु कीन्ह अस्नाना॥ करि पूजा नैबेद्य चढ़ावा। आपु गई जहँ पाक बनावा॥ बहुरि मातु तहवाँ चलि आई। भोजन करत…
जसि बिबाह कै बिधि श्रुति गाई। महामुनिन्ह सो सब करवाई॥गहि गिरीस कुस कन्या पानी। भवहि समरपीं जानि भवानी॥पानिग्रहन जब कीन्ह महेसा। हिंयँ हरषे तब सकल सुरेसा॥बेद मंत्र मुनिबर उच्चरहीं।…
॥श्री गणेशाय नमः॥ श्रीजानकीवल्लभो विजयते श्री रामचरित मानस प्रथम सोपान (बालकाण्ड) श्लोक- वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥१॥…
श्री राम चरित मानस अवधी भाषा में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा १६वीं सदी में रचित एक महाकाव्य है। श्री रामचरित मानस भारतीय संस्कृति मे एक विशेष स्थान रखती है। उत्तर भारत में रामायण के…