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एस्ट्रो धर्म : बच्चों के स्वभाव में गुस्सा और जिद्दीपन कभी कभी माता पिता को बड़ी चिंता में डाल देता है। अगर बच्चों के व्यवहार में आए इस बदलाव को शीघ्र ही गंभीरता से नहीं लिया तो…
एस्ट्रो धर्म : हनुमान जी को भगवान शिव का 11वां रुद्रावतार व चिरंजीवी माना जाता है। सनातन धर्म में हनुमान ही एक ऐसे भगवान है जिनकी पूजा कलयुग में सबसे ज्यादा की जाती है। यही कारण…
एस्ट्रो धर्म : भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार श्री हनुमानजी मंगल के कारक देव माने जाते हैं। हनुमानजी को प्रसन्न करना भी भगवान भोलेनाथ की तरह आसान माना जाता है, वहीं कलयुग के देव…
एस्ट्रो धर्म : शनिवार के दिन जिस भी रूप में पवन पुत्र महाबली हनुमान जी की पूजा आराधना की जाती है वें प्रसन्न हो जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि जिसी किसी भक्त के उपर श्री हनुमान जी की…
एस्ट्रो धर्म : नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के समान ही अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता हनुमान जी का पूजन भी विशेष माना गया है। श्रीराम के समान ही हनुमान के देवी के साथ होने की भी…
ऐस्ट्रो धर्म : हनुमान जी इस कलयुग में जागृत देव हैं। हनुमान जी की कृपा से सारी परेशानियां दूर हो जाती हैं। हनुमान जी की कृपा पाने के लिए बस आपको नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करना…
एस्ट्रो धर्म : भगवान शिव को सनातन धर्म के प्रमुख देवों में से एक माना गया है। आदि पंच देवों में जहां महादेव को खास स्थान प्राप्त है वहीं देवाधिदेव को संहार का देवता माना जाता है।…
ऐस्ट्रो धर्म : शनिवार के दिन शनिदेव और हनुमानजी की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन भगवान हनुमान की पूजा करने से शनिदेव प्रसन्न रहते हैं और हनुमान भक्तों पर उनकी कृपा बनी…
श्रीजानकीवल्लभो विजयते श्रीरामचरितमानस पञ्चम सोपान सुन्दरकाण्ड श्लोक शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम् । रामाख्यं…
अतुलित बलधामं हेमशैलाभदेहं। दनुज वन कृशानुं, ज्ञानिनामग्रगण्यम्।। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं। रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि।। दोहा निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान। तेहि…
एक बार गंगाजी के पावन तट पर विराजमान श्री सूत-जी महाराज से शौनकादी ऋषियों ने निवेदन किया- "हमे किसी श्रेष्ट व्रत का विधान बता दे. श्री सूत-जी महाराज बोले कि- ऋषिगण! अपने बहुत…
हनुमान पूर्वत: पातु दक्षिणे पवनात्मज:। पातु प्रतीच्यां रक्षोघ्न: पातु सागरपारग:॥1॥ उदीच्यामर्ूध्वत: पातु केसरीप्रियनन्दन:। अधस्ताद् विष्णुभक्तस्तु पातु मध्यं च पावनि:॥2॥…
निश्चय प्रेम प्रतीत ते, विनय करें सनमान । तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्घ करैं हनुमान ॥ जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥ जन के काज बिलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख…
बाल समय रवि भक्ष लियो तब, तीनहुं लोक भयो अँधियारो ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो देवन आनि करी विनती तब, छांड़ि दियो रवि कष्ट निहारो को नहिं जानत है जग में…