लंदन में ध्रुव राठी के विरोध प्रदर्शन पर विवाद, कुलदीप शेखावत ने पाकिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिकों की मौजूदगी का लगाया आरोप


नई दिल्ली, 3 नवंबर 2026: भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान और बांग्लादेश में आम लोगों की आर्थिक और बुनियादी समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। पाकिस्तान के कराची में बिजली कटौती और गैस की किल्लत के खिलाफ लोगों ने प्रदर्शन किया, वहीं बांग्लादेश की राजधानी ढाका और आसपास के औद्योगिक इलाकों में कपड़ा मजदूर वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए। दोनों देशों में अलग-अलग मुद्दों पर हो रहे इन प्रदर्शनों ने सरकारों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।कराची में बिजली कटौती और गैस संकट से नाराजगी
पाकिस्तान के कराची में लोगों की नाराजगी की बड़ी वजह बिजली और रसोई गैस की अनियमित आपूर्ति है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई इलाकों में रोजाना करीब 16 घंटे तक बिजली कटौती की शिकायतों के बीच लोगों और PPP नेताओं ने कराची प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन किया और बिजली कंपनी K-Electric के खिलाफ विरोध जताया।ढाका में 30 हजार टका न्यूनतम वेतन की मांग
बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग के हजारों मजदूर न्यूनतम मासिक वेतन 30,000 टका करने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल उनका वेतन करीब 12,500 टका बताया गया है। मजदूरों का कहना है कि महंगाई और घरेलू खर्च बढ़ने के कारण मौजूदा वेतन में गुजारा मुश्किल हो गया है।
ढाका, गाजीपुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों ने सड़कें जाम कीं। कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। हिंसा और आगजनी के मामलों में गिरफ्तारियां भी हुई हैं।सरकार के कदम के बावजूद क्यों नहीं थमा विरोध?
बांग्लादेश सरकार ने 1 नवंबर को कपड़ा उद्योग के न्यूनतम वेतन की समीक्षा के लिए छह सदस्यीय वेतन बोर्ड बनाने की घोषणा की थी। इसके बावजूद मजदूरों का प्रदर्शन जारी है। उनकी मांग है कि वेतन बढ़ाने की प्रक्रिया जल्द पूरी हो और महंगाई के अनुपात में उन्हें राहत मिले।दोनों देशों में असंतोष की वजह अलग-अलग
पाकिस्तान में प्रदर्शन का केंद्र बिजली और गैस की समस्या है, जबकि बांग्लादेश में मजदूरों का आंदोलन वेतन और महंगाई को लेकर है। हालांकि दोनों घटनाएं यह दिखाती हैं कि रोजमर्रा की जरूरतों और आर्थिक दबाव से जुड़ी समस्याएं किस तरह बड़े जनप्रदर्शन का रूप ले सकती हैं।
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संपादक, आज की दिल्ली







