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धनतेरस और शादियों के त्योहारी सीजन से ठीक पहले सर्राफा बाजार में सोने की लगातार घटती कीमतों ने खरीदारों और निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है। जो सोना जनवरी में ₹1.75 लाख प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया था और जिसके ₹2 लाख तक पहुंचने के कयास लगाए जा रहे थे, वह अक्टूबर के अंत तक टूटकर करीब ₹1.43 लाख प्रति 10 ग्राम के दायरे में आ गया है।
लगातार महीनों से जारी इस बिकवाली के चलते सोने में करीब 20 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट दर्ज की जा चुकी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या मौजूदा भाव पर खरीदारी फायदेमंद है या कीमतों में और फिसलन का जोखिम बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू स्तर पर सोने की कीमतों में नरमी का सबसे बड़ा कारण अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड का ऊंचे स्तरों पर टिके रहना माना जा रहा है।
क्या होता है सरकारी बॉन्ड: जब अमेरिकी सरकार विकास कार्यों और वित्तीय जरूरतों के लिए निवेशकों से कर्ज लेती है, तो बदले में एक लिखित सुरक्षा पत्र यानी 'बॉन्ड' जारी करती है। इसमें तय समय बाद मूलधन लौटाने और तय अवधि पर नियमित ब्याज देने की कानूनी गारंटी होती है।
क्या है बॉन्ड यील्ड: बॉन्ड पर मिलने वाला सालाना ब्याज दर या रिटर्न उसकी 'यील्ड' कहलाता है। उदाहरण के लिए, यदि 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड 5% पर चल रही है, तो सरकार को दिए गए हर $1,00,000 के निवेश पर निवेशक को सालाना $5,000 का सुनिश्चित ब्याज मिलता है और मियाद पूरी होने पर पूरी रकम सुरक्षित वापस मिल जाती है।
सोना एक 'नॉन-यील्डिंग एसेट' है—यानी सोने में पैसा लगाने पर कोई नियमित ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता, बल्कि सिर्फ उसके भाव बढ़ने पर ही रिटर्न हासिल होता है।
जब दुनिया की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था यानी अमेरिकी सरकार के बॉन्ड पर 4% से 5% तक का पक्का और जोखिम-रहित रिटर्न मिल रहा हो, तो वैश्विक संस्थागत निवेशक सोने जैसे गैर-ब्याज वाले सुरक्षित निवेश से पैसा निकालकर अमेरिकी डेट मार्केट में लगाने लगते हैं। निवेशकों के इस रुख से डॉलर मजबूत होता है और सोने की वैश्विक मांग घटने से उसकी कीमतों में सीधा दबाव बनता है।
गिरावट के दौर में त्योहारी खरीदारी को लेकर जानकारों के मुख्य आर्थिक पहलू:
सस्ती खरीदारी का अवसर: जनवरी के उच्चतम स्तर की तुलना में लगभग 20% सस्ता सोना उन लोगों के लिए राहत लेकर आया है, जिन्हें आगामी शादियों के लिए जेवराती खरीदारी करनी थी।
निवेशकों के लिए रणनीति: यदि आप लंबी अवधि (3 से 5 साल या उससे अधिक) के नजरिए से खरीदारी कर रहे हैं, तो गिरावट के स्तरों पर 'सिस्टमैटिक' या टुकड़ों में सोना जोड़ना ऐतिहासिक रूप से सुरक्षित माना जाता है। वहीं, शॉर्ट-टर्म मुनाफे के लिए निवेश करने वालों को अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों के रुख पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि यील्ड ऊंची रहने तक सोने में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
संपादक, आज की दिल्ली