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पायो जी मैने राम रतन धन पायो

Journalist Today Network1 मिनट में पढ़ें

पायो जी मैने राम रतन धन पायो
वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु, किरपा कर अपनायो
जनम जनम की पूंजी पाई, जग में सभी खोवायो
खरचे ना खूटे, चोर न लूटे, दिन-दिन बढ़त सवायो
सत की नाव खेवटिया सतगुरु, भवसागर तर आयो
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, हरष हरष जस गायो
पायो जी मैने राम रतन धन पायो

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