शीर्षक: 'बाहर पहले ही लाखों आलोचक हैं, घर में क्यों हों?'— अमिताभ बच्चन ने दिया पेरेंटिंग का बड़ा सबक, कहा- कभी नहीं की अभिषेक की आलोचना


नई दिल्ली: प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज के दरबार में पहुंची एक पीड़ित मां ने अपने बीमार बेटे और ससुराल वालों के ताने को लेकर अपनी गहरी पीड़ा बयां की। महिला ने रोते हुए बताया कि उसका 19 साल का बेटा गंभीर बीमारी से जूझ रहा है और उसे बार-बार दौरे पड़ते हैं। कई बड़े अस्पतालों और डॉक्टरों से इलाज करवाने के बाद भी उसके स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो रहा है।महिला ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि बेटे की इस गंभीर हालत के बीच उसके पति और सास सहानुभूति दिखाने के बजाय उसे ही दोषी ठहराते हैं। ससुराल वाले कहते हैं कि बेटे की बीमारी उसके पिछले जन्मों और बुरे कर्मों का फल है। इस पर भावुक होकर महिला ने पूछा, "क्या बच्चा केवल मां से पैदा होता है? क्या उसके जन्म और स्थिति में केवल मां के ही कर्म होते हैं?"मां का यह दर्द सुनकर अनिरुद्धाचार्य जी ने ढांढस बंधाते हुए कहा कि कर्म किसी एक के नहीं, बल्कि सभी के होते हैं। उन्होंने बच्चे के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की और परिवार को किसी अच्छे विशेषज्ञ डॉक्टर से उचित उपचार जारी रखने की सलाह दी।
मुख्य बिंदु:
दौरे की बीमारी से पीड़ित बेटा: 19 वर्षीय बेटा दौरे पड़ने की गंभीर समस्या से जूझ रहा है।
पति और सास के ताने: ससुराल पक्ष द्वारा बीमारी का दोष मां के कर्मों पर मढ़े जाने से आहत हुई महिला।
अनिरुद्धाचार्य जी की सलाह: कथावाचक ने कहा कि कर्म सबके होते हैं, केवल मां को दोषी ठहराना अनुचित है; उन्होंने बेहतर चिकित्सकीय इलाज जारी रखने की सलाह दी।
अनिरुद्धाचार्य महाराज (Aniruddhacharya Ji Maharaj)
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बीमार बेटे पर मां का दर्द (Mother Emotional Breakdown)
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संपादक, आज की दिल्ली







