40 एकड़ के एयरफोर्स स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स पर विवाद, रिटायरमेंट से पहले पूर्व वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने राजनाथ सिंह से की अपील


आंध्र प्रदेश में मुरासु चक्रवात का कहर, हजारों पेड़ उखड़े और सैकड़ों बिजली के खंभे धराशायी; आसमान से दिखी तबाही की भयावह तस्वीरें
नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान 'मुरासु' ने मंगलवार सुबह आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई। तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। कई इलाकों में बड़े-बड़े पेड़ जड़ से उखड़ गए, बिजली के खंभे गिर गए और मछुआरों की नावों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
मौसम विभाग के मुताबिक, मुरासु चक्रवात ने मंगलवार तड़के नेल्लोर और नरसापुर के बीच ओंगोल के पास आंध्र प्रदेश के तट को पार किया। इस दौरान हवाओं की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा रही, जबकि झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई।
प्रकाशम, बापटला और आसपास के तटीय जिलों में तूफान का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला। कई स्थानों पर सड़कें जलमग्न हो गईं और बिजली आपूर्ति तथा यातायात प्रभावित हुआ।
तूफान के कारण आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में हजारों पेड़ उखड़ गए। सैकड़ों बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हुए और मछुआरों की कई नावें भी तबाह हो गईं। सड़कें पेड़ों और मलबे से भर गईं, जिससे राहत एवं बचाव कार्य में भी मुश्किलें आईं।
कोनासीमा जिले में पेड़ गिरने से एक महिला की मौत होने की खबर है।
मुरासु के प्रभाव से आंध्र प्रदेश के कई इलाकों में भारी बारिश हुई। बापटला में 222.4 मिलीमीटर, नरसापुर में 198.6 मिलीमीटर और ओंगोल में 120.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
मुरासु चक्रवात का असर केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं रहा। तमिलनाडु के चेन्नई, चेंगलपट्टू और तिरुवल्लूर में भी भारी बारिश हुई। ओडिशा के गंजाम, गजपति, रायगढ़ा, कोरापुट और मलकानगिरि जिलों में तेज हवाओं, बारिश और बिजली चमकने की घटनाएं सामने आईं।
इसके अलावा तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में भी मौसम प्रभावित हुआ।
तूफान से प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन और आपदा राहत टीमें सड़कों से गिरे पेड़ों और मलबे को हटाने तथा प्रभावित लोगों की मदद में जुटी हैं। चक्रवात के आगे बढ़ने के साथ इसकी तीव्रता धीरे-धीरे कम होने का अनुमान जताया गया है।
तूफान ने एक बार फिर तटीय इलाकों में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों और समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के महत्व को सामने ला दिया है।
विषय
संपादक, आज की दिल्ली





