
BJP नेताओं ने ही रची मेरे खिलाफ साजिश, मुझे हटाने के लिए करवाए दंगे: एन. बीरेन सिंह का गंभीर आरोप
मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य के कुछ भाजपा नेताओं पर कांग्रेस के साथ मिलकर साजिश रचने का लगाया आरोप, बोले- भाजपा को निजी संपत्ति समझते हैं कुछ नेता; मौजूदा सरकार के कामकाज पर भी उठाए सवाल
नई दिल्ली। मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने अपनी ही पार्टी भाजपा के कुछ स्थानीय नेताओं पर गंभीर आरोप लगाकर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। उन्होंने दावा किया है कि उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए राज्य के कुछ भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के साथ मिलकर साजिश रची थी। उनके अनुसार, वर्ष 2017 से ही उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया गया और कुछ नेता यह स्वीकार नहीं कर पा रहे थे कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने के बाद वह दो बार मुख्यमंत्री कैसे बन गए।
बीरेन सिंह ने स्पष्ट किया कि उनके आरोप भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर नहीं, बल्कि राज्य के कुछ नेताओं पर हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग भाजपा को अपनी निजी संपत्ति समझते हैं। इन्हीं नेताओं ने उनके खिलाफ साजिश रची और आखिरकार उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।
मुख्यमंत्री बदलने से भी नहीं रुकी हिंसा
पूर्व मुख्यमंत्री ने मणिपुर में जारी जातीय हिंसा और नगा-कुकी समुदायों के बीच तनाव का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि उन्हें हटाने के बाद भी राज्य में शांति क्यों नहीं लौट पाई। उन्होंने कहा कि जब उन पर बहुसंख्यक समुदाय का पक्ष लेने के आरोप लगाए जा रहे थे, तब दावा किया गया था कि उनके हटने से हालात सुधर जाएंगे। लेकिन अब भी हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं।
उन्होंने मौजूदा हालात पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब वह मुख्यमंत्री नहीं हैं, फिर भी हिंसा क्यों जारी है? उन्होंने इसे ईसाई बनाम ईसाई संघर्ष बताते हुए उन लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठाए, जो पहले उन पर आरोप लगा रहे थे।
मौजूदा भाजपा सरकार के कामकाज से नाराज
एन. बीरेन सिंह ने मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार के कामकाज पर भी असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि भाजपा जनता का भरोसा खो सकती है, क्योंकि पार्टी के प्रमुख राजनीतिक मुद्दों पर सरकार की ओर से अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।
उन्होंने नशे के खिलाफ अभियान, अफीम की अवैध खेती पर कार्रवाई और संदिग्ध अवैध प्रवासियों की बायोमीट्रिक पहचान जैसे मुद्दों को उठाया। उनका कहना है कि सरकार को पहले से शुरू किए गए इन अभियानों को आगे बढ़ाना चाहिए और राज्य के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
9 फरवरी 2025 को दिया था इस्तीफा
गौरतलब है कि एन. बीरेन सिंह ने 9 फरवरी 2025 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उस समय राज्य में जारी हिंसा, सरकार के भीतर बढ़ते असंतोष और विपक्ष की ओर से अविश्वास प्रस्ताव की संभावनाओं के बीच राजनीतिक दबाव बढ़ गया था।
वाई. खेमचंद सिंह भी उन वरिष्ठ भाजपा नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने कथित तौर पर बीरेन सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग की थी। बाद में खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।
क्या फिर मुख्यमंत्री बनेंगे बीरेन सिंह?
विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए जनता का खोया हुआ विश्वास वापस हासिल करने की संभावनाओं पर पूछे गए सवाल के जवाब में बीरेन सिंह ने उम्मीद जताई कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व स्थिति को संभालने के लिए हस्तक्षेप करेगा।
दोबारा मुख्यमंत्री बनने की संभावना पर उन्होंने कहा कि इस बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि जनता के बीच उन्हें फिर से मुख्यमंत्री बनाने की जबरदस्त मांग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पद का फैसला चुनाव में मिलने वाले बहुमत और पार्टी के निर्णय पर निर्भर करेगा।
राजनीतिक महत्व: बीरेन सिंह के इन बयानों से मणिपुर भाजपा के भीतर मतभेद और राज्य की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई हैं।
संपादक, आज की दिल्ली
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