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अहोई अष्टमी पर जरूर पढ़ें श्री गणेश जी की यह पावन कथा; इसके बिना अधूरी मानी जाती है पूजा

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धर्म डेस्क | नई दिल्ली अहोई अष्टमी के पावन व्रत पर माताएं अपनी संतान के सुखी जीवन, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई अष्टमी की मुख्य व्रत कथा (साहूकार और स्याहू की कहानी) के साथ-साथ श्री गणेश जी की कथा पढ़ना या सुनना भी अत्यंत आवश्यक माना जाता है। इसके बिना व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।

श्री गणेश जी की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में एक साहूकार रहता था। उसके सात बेटे और एक बेटी थी। दीपावली के पावन पर्व से ठीक पहले घर की साफ-सफाई और लीपा-पोती के लिए सातों बहुएं और उनकी ननद जंगल में मिट्टी लाने गईं।

  • अनजाने में त्रुटि: ननद जिस जगह मिट्टी खोद रही थी, वहीं पास में भगवान श्री गणेश जी का एक प्राचीन और चमत्कारी स्थान था। मिट्टी खोदते समय अनजाने में ननद के हाथों गणेश जी के पवित्र प्रतीक या स्थान को खंडित हो गया।

  • गणेश जी का कोप: इस अनाड़ीपन और गलती के कारण विघ्नहर्ता श्रीगणेश रुष्ट हो गए और उन्होंने उस ननद की कोख बांध दी। इसके बाद से उसे कभी संतान का सुख नहीं मिला, और उसके बाद जो भी संतान हुई, वह जीवित नहीं रह पाई।

संकट निवारण और गणेश स्तुति

अपनी बहन की इस दुर्दशा और लगातार दुखों को देखकर साहूकार के सातों भाइयों और उनकी पत्नियों ने पंडितों से सलाह ली। पंडितों ने बताया कि यह सब भगवान गणेश की रुष्टता और कोख बंधने के कारण हो रहा है।

  1. क्षमा-याचना: सभी ने मिलकर विधि-विधान से श्री गणेश जी की पूजा करने का निर्णय लिया। छोटी बहू और उसकी ननद ने सच्चे मन से प्रथम पूज्य गणेश जी की आराधना की और अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगी।

  2. संकट मोचन का आशीर्वाद: विघ्नहर्ता भगवान गणेश भक्तों की सच्ची भक्ति देखकर प्रसन्न हुए। उन्होंने ननद की कोख का बंधन खोल दिया और आशीर्वाद दिया कि जो भी माता इस दिन अहोई माता के साथ श्री गणेश जी का स्मरण करेगी, उसके सभी विघ्न दूर होंगे और उसकी संतान पर कभी कोई संकट नहीं आएगा।

पूजा में गणेश वंदना का महत्व

  • विघ्नहर्ता का आह्वान: किसी भी व्रत या अनुष्ठान की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से ही होती है। अहोई अष्टमी के दिन अहोई माता की तस्वीर के साथ गणेश जी की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।

  • व्रत की पूर्णता: माताएं जब शाम को तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं, तो गणेश जी की कथा का पाठ करने से व्रत की संपूर्णता और घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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योगराज शर्मा

संपादक, आज की दिल्ली

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