
जिनके एक बयान से भड़की एकनाथ शिंदे की शिवसेना; 3 साल में जीता देवेंद्र फडणवीस का भरोसा
मुंबई ब्यूरो
महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) चुनाव नतीजों के बाद महायुति गठबंधन के भीतर खींचतान खुलकर सामने आ गई है। नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने शिवसेना पर सीधा आरोप मढ़ दिया कि उन्होंने गठबंधन धर्म नहीं निभाया। बन के इस बयान के बाद शिंदे गुट के नेता आगबबूला हैं, जबकि नवनाथ बन अपने रुख पर अडिग हैं।
विवाद की मुख्य वजह
महाराष्ट्र विधान परिषद की सीटों (खासकर नागपुर और पुणे शिक्षक/स्नातक क्षेत्रों) पर महायुति को अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद नवनाथ बन ने कहा:
"अगर एकनाथ शिंदे की शिवसेना से सही और पूरा सहयोग मिला होता, तो महायुति पांचों की पांचों सीटें जीत सकती थी। शिवसेना के असहयोग और ऐन वक्त पर निर्दलीय उम्मीदवारों को समर्थन देने जैसे फैसलों से गठबंधन को नुकसान हुआ।"
इस बयान के बाद शिंदे गुट और भाजपा के बीच तनातनी तेज हो गई।
शिंदे गुट के नेताओं के तीखे हमले
निलेश राणे (विधायक व शिवसेना नेता): "नवनाथ बन, शिंदे साहब पर बोलते समय अपनी मर्यादा में रहा करो। तुम्हारी हैसियत क्या है? तुम सिर्फ एक प्रवक्ता हो, पूरी भाजपा नहीं।"
रवींद्र धंगेकर (नेता): बन को 'पगारी पत्रकार' बताते हुए चेतावनी दी कि वे पुणे समेत पूरे महाराष्ट्र में घूमने नहीं देंगे।
उदय सामंत (कैबिनेट मंत्री): "वे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से जवाब मांगने या उन्हें सलाह देने जितने बड़े नहीं हैं।"
आनंद दुबे (प्रवक्ता, शिंदे गुट): "महायुति एक परिवार की तरह है, परिवार में थोड़ी-बहुत नोक-झोंक चलती रहती है।"
पलटवार: झुकने को तैयार नहीं नवनाथ बन
चौतरफा हमलों के बावजूद नवनाथ बन पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने विरोधियों को कड़ा जवाब देते हुए कहा कि देवेंद्र फडणवीस पर कोई भी अमर्यादित टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और बयानबाजी करने वाले पहले अपनी राजनीतिक हैसियत देखें। इसके साथ ही उन्होंने महाविकास आघाड़ी (MVA) के नेता संजय राउत पर भी तीखे प्रहार जारी रखे।
छात्र राजनीति से मुख्य प्रवक्ता तक का सफर
मूल निवास व शिक्षा: नवनाथ बन मूल रूप से नांदेड़ जिले की अर्धापुर तहसील के कोंढा गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई मराठवाड़ा में की और बीड के स्वातंत्र्यवीर सावरकर कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की।
छात्र राजनीति: वे शुरुआत से ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में सक्रिय रहे और वर्ष 2004 से 2008 के दौरान बीड के ABVP नगर सचिव रहे। कॉलेज के दिनों में वे वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भी अव्वल रहते थे।
पत्रकारिता का दौर: वर्ष 2008 में उन्होंने सक्रिय पत्रकारिता में कदम रखा। उन्होंने 'गावकरी' और 'मराठवाड़ा' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में वर्षों तक काम किया। पत्रकारिता के अनुभव के कारण उन्हें शब्दों के चयन और सटीक संवाद में महारत हासिल है।
भाजपा में उभार: पत्रकारिता से राजनीति में आने के महज तीन सालों के भीतर उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, विशेषकर देवेंद्र फडणवीस का गहरा विश्वास हासिल किया और आज वे महाराष्ट्र भाजपा के प्रमुख फायरब्रांड प्रवक्ताओं में गिने जाते हैं।
संपादक, आज की दिल्ली
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