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दिल्ली के बाहरी इलाकों में होने चाहिए धरना-प्रदर्शन': कैट ने उठाई मांग; कहा- विरोध के अधिकार से व्यापार और आम जनजीवन न हो प्रभावित

योगराज शर्मा2 मिनट में पढ़ें

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बार-बार होने वाले धरना-प्रदर्शनों, रैलियों और चक्का जाम को लेकर गंभीर चिंता जताई है। कैट ने मांग की है कि दिल्ली के मध्यवर्ती इलाकों और प्रमुख बाजारों के बजाय विरोध-प्रदर्शनों के लिए शहर के बाहरी इलाकों (Outskirts) में विशेष स्थल निर्धारित किए जाने चाहिए। संगठन ने स्पष्ट किया कि संविधान में दिए गए लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार का सम्मान होना चाहिए, लेकिन इसकी कीमत आम नागरिकों की आवाजाही और व्यापारियों के आजीविका के नुकसान के रूप में नहीं चुकाई जा सकती।विरोध के अधिकार और आजीविका के अधिकार में संतुलन जरूरी

कैट के राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि दिल्ली देश की राजधानी होने के साथ-साथ उत्तर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र भी है। जब भी मध्य दिल्ली, जंतर-मंतर, संसद मार्ग या प्रमुख सीमाओं पर बड़े धरने या आंदोलन होते हैं, तो:

  • व्यापार पर सीधा असर: थोक और खुदरा बाजारों में माल की आपूर्ति ठप हो जाती है, जिससे रोजाना करोड़ों रुपये का व्यापारिक नुकसान होता है।

  • आम जनजीवन बेहाल: सड़कों पर लगने वाले भीषण जाम के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों, दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को घंटों फंसे रहना पड़ता है।

कैट ने रेखांकित किया कि किसी भी संगठन या समूह को विरोध दर्ज करने का पूरा अधिकार है, लेकिन यह अधिकार दूसरों के मौलिक अधिकारों—विशेष रूप से निर्बाध आवागमन और व्यापार करने की स्वतंत्रता—का हनन करके नहीं मिलना चाहिए।तय हो 'प्रोटेस्ट जोन', तय हों सख्त नियम

व्यापारी संगठन ने केंद्र सरकार, उपराज्यपाल और दिल्ली पुलिस से आग्रह किया है कि शहर की व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए दीर्घकालिक नीति बनाई जाए:

  1. शहर से बाहर निर्धारित स्थल: बुराड़ी, टिकरी या अन्य सीमावर्ती खुले क्षेत्रों की तरह शहर के बाहरी हिस्सों में सुसज्जित 'प्रोटेस्ट ग्राउंड' विकसित किए जाएं, जहां पानी, शौचालय और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों।

  2. कोर एरिया में रोक: संसद भवन के आसपास, संवेदनशील प्रशासनिक क्षेत्रों और घनी आबादी वाले बाजारों में किसी भी प्रकार के सड़क जाम या अनिश्चितकालीन धरने की अनुमति न दी जाए।

  3. सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान पर जवाबदेही: प्रदर्शनों के दौरान होने वाले आर्थिक और सार्वजनिक नुकसान की भरपाई आयोजकों से कराने के नियमों का सख्ती से पालन हो।

कैट ने विश्वास जताया कि यदि विरोध प्रदर्शनों को सुनियोजित रूप से शहर के बाहरी इलाकों में शिफ्ट किया जाता है, तो इससे लोकतंत्र की अभिव्यक्ति भी सुरक्षित रहेगी और दिल्ली की रफ्तार व व्यापार भी बेरोकटोक जारी रह सकेगा।

योगराज शर्मा

संपादक, आज की दिल्ली

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