दिल्ली में सरकारी निर्माण कार्यों का बदलेगा तरीका, अब आर्किटेक्ट पर होगी पूरी जिम्मेदारी!


नई दिल्ली। दिल्ली-NCR में लगातार बिगड़ती हवा की गुणवत्ता पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण का प्रमुख कारण है। दिल्ली और आसपास के शहरों को जोड़ने वाली सड़कों पर बंपर-टू-बंपर ट्रैफिक से स्थिति और खराब हो रही है।
अदालत ने सवाल उठाया कि तमाम प्रतिबंधों और सरकारी उपायों के बावजूद प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं हो पा रहा है। पीठ ने तत्काल, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक उपाय अपनाने की जरूरत बताई। गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और ग्रेटर नोएडा से दिल्ली आने-जाने वाले वाहनों की भारी संख्या पर भी चिंता जताई गई।
सुनवाई में गरीब और दिहाड़ी मजदूरों पर प्रदूषण के प्रभाव का मुद्दा भी उठा। अदालत ने पराली जलाने की समस्या पर किसानों को जागरूक करने और फसल अवशेषों की खरीद के लिए आर्थिक प्रोत्साहन देने जैसे विकल्पों पर विचार करने की बात कही। स्कूलों को बंद करने या हाइब्रिड कक्षाएं चलाने के मुद्दे पर भी विशेषज्ञों की राय लेने की बात सामने आई।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, 6 नवंबर को दिल्ली का औसत AQI 391 दर्ज किया गया था। रोहिणी में यह 475 और आईआईटी दिल्ली क्षेत्र में 472 तक पहुंच गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में आगे की सुनवाई 16 नवंबर को निर्धारित की है
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संपादक, आज की दिल्ली







