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दिवाली पर मां लक्ष्मी के चरण चिह्न लगाने के वास्तु नियम और सही दिशा

योगराज शर्मा2 मिनट में पढ़ें

दिवाली के महापर्व पर घर में देवी लक्ष्मी के चरण चिह्न (चरण पादुका) लगाना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि इन चरण चिह्नों को सही स्थान, उचित दिशा और नियमों के अनुसार स्थापित किया जाए, तो घर में धन की देवी का वास होता है, आर्थिक तंगी दूर होती है और आय के नए स्रोत खुलते हैं।

किस दिशा और स्थान पर लगाएं चरण पादुका?

  • घर के अंदर की ओर प्रवेश: चरण चिह्न सदैव इस प्रकार लगाएं कि पैरों की उंगलियां बाहर से अंदर की तरफ हों। यह इस बात का प्रतीक है कि माता लक्ष्मी बाहर से आपके घर के भीतर प्रवेश कर रही हैं।

  • मुख्य द्वार: देवी के आगमन का प्रमुख मार्ग घर का मुख्य द्वार होता है, इसलिए प्रवेश द्वार की चौखट पर चरण चिह्न लगाना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

  • पूजा स्थल या तिजोरी: यदि आप मंदिर या तिजोरी के निकट चरण पादुका स्थापित कर रहे हैं, तो उनका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखें।

किन स्थानों पर चरण चिह्न लगाने से बचें?

  • फर्श या जमीन पर सीधे न लगाएं: चरण चिह्नों को सीधे जमीन पर चिपकाने की भूल न करें, जिससे उन पर किसी के पैर पड़ें। इन्हें चौखट पर या जमीन से थोड़ा ऊपर स्थापित करना चाहिए।

  • शौचालय व अंधेरे कोने: बाथरूम/टॉयलेट के पास या घर के ऐसे अंधेरे कोनों में, जहां गंदगी या कबाड़ रहता हो, चरण चिह्न कभी न लगाएं।

  • स्वच्छता का ध्यान: जहां भी चरण चिह्न लगे हों, उसके आसपास कूड़ेदान, पुराने जूते-चप्पल या धूल-मिट्टी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए।

वास्तु के जरूरी नियम

  1. सदा जोड़े में लगाएं: चरण चिह्न हमेशा दोनों पैरों के जोड़े में ही लगाएं, कभी भी एक पैर का चिह्न न लगाएं।

  2. पवित्रता और शुद्धिकरण: लगाने से पूर्व उस स्थान को भली-भांति साफ करके गंगाजल छिड़कें।

  3. शुभ रंगों का चयन: लाल, गुलाबी या सुनहरा रंग देवी लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है। चरण पादुका इन्हीं रंगों की होनी चाहिए; काले या नीले रंग के प्रयोग से बचें।

  4. स्वास्तिक का अंकन: यदि आप सिंदूर या रंगोली से चरण चिह्न बना रहे हैं, तो उनके दोनों ओर स्वास्तिक अवश्य बनाएं।

  5. पुराने स्टीकर का विसर्जन: यदि पहले से लगा स्टीकर बदलना हो, तो पुराने स्टीकर को कभी कूड़ेदान में न फेंकें। उसे किसी पेड़ की जड़ में रख दें या बहते जल में प्रवाहित करें।

योगराज शर्मा

संपादक, आज की दिल्ली

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