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दिवाली से पहले हरकी पैड़ी पर लौटी गंगा मैया; डुबकी लगाने के लिए मिलेगा 3 से 4 फीट पानी, महाआरती पर जलस्तर बढ़ाने की तैयारी

योगराज शर्मा2 मिनट में पढ़ें

धर्म डेस्क | हरिद्वार दीपावली और गोवर्धन पूजा के पावन अवसर पर हरिद्वार में गंगा स्नान का संकल्प लेने वाले श्रद्धालुओं के लिए राहत भरी खबर है। हरकी पैड़ी के प्रमुख स्नान घाटों पर दिवाली से ठीक पहले गंगाजल का प्रवाह पुनः शुरू हो गया है। हालांकि, घाटों के जीर्णोद्धार और नए निर्माण कार्यों के कारण फिलहाल गंगा नदी पहले की तरह लबालब नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं को केवल 3 से 4 फीट (घुटनों तक) पानी में ही आस्था की डुबकी लगानी होगी।

गंगनहर की वार्षिक बंदी और सफाई

  • दशहरे से दिवाली तक बंदी: हर साल दशहरे की मध्यरात्रि से दिवाली तक गंगनहर की वार्षिक गाद सफाई और मरम्मत के लिए उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा पानी रोका जाता है।

  • सूख गए थे घाट: नहर बंदी के बाद हरकी पैड़ी और आसपास के घाट पूरी तरह सूख गए थे। इस दौरान घाटों की तलहटी से अंग्रेजों के जमाने की पुरानी रेलवे पटरियां तक दिखाई देने लगी थीं और स्थानीय लोग सूखे तल में सिक्के तलाशते नजर आ रहे थे।

  • दिवाली से पहले अस्थायी बहाली: आगामी त्योहारों को देखते हुए सिंचाई विभाग ने अस्थायी मिट्टी की बोरियों के बंधे और रेगुलेटर के जरिए जलधारा को हरकी पैड़ी की तरफ मोड़ा है, जिससे घाटों पर रौनक वापस लौट आई है।

पूरा पानी न छोड़ने की मुख्य वजह

  1. अर्धकुंभ की तैयारियां: हरिद्वार में आगामी अर्धकुंभ को लेकर युद्धस्तर पर बुनियादी ढांचे के विकास कार्य चल रहे हैं।

  2. घाटों व नए पुलों का निर्माण: मेला क्षेत्र में नए स्नान घाटों, सुरक्षा रेलिंग और पैदल पुलों के निर्माण का काम प्रगति पर है। काम बाधित न हो और गुणवत्ता बनी रहे, इसलिए नदी में जलस्तर को नियंत्रित रखा गया है।

  3. अनिवार्य जल प्रवाह का नियम: मान्यताओं और सरकारी नियमों के मुताबिक, हरकी पैड़ी के ब्रह्मकुंड पर हमेशा कम से कम 200 क्यूसेक पानी का निरंतर प्रवाह रहना अनिवार्य है, जिसे ध्यान में रखते हुए पानी छोड़ा गया है।

दिवाली की शाम महाआरती पर बढ़ेगा जलस्तर

प्रशासन और मंदिर प्रबंधन का कहना है कि दिवाली की शाम हरकी पैड़ी पर होने वाली भव्य महाआरती और दीपदान के समय देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। भक्तों को पूजा-अर्चना और आचमन में कोई असुविधा न हो, इसके लिए दिवाली के दिन जलस्तर को थोड़ा और बढ़ाया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गहरे पानी में स्नान करने के बजाय श्रद्धालु सुरक्षित घेरे और घुटनों तक बहती जलधारा में ही स्नान करें।

योगराज शर्मा

संपादक, आज की दिल्ली

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