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धर्म एवं ज्योतिष डेस्क | नई दिल्ली दीपावली के पंचदिवसीय महापर्व की शुरुआत कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी यानी 'धनतेरस' (धनत्रयोदशी) से होती है। इस पावन अवसर पर आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर देव की आराधना के साथ-साथ नई वस्तुओं की खरीदारी की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन खरीदी गई वस्तुएं घर-परिवार में सुख, समृद्धि और आरोग्य की वृद्धि करती हैं। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इस वर्ष सोने के अलावा चांदी, स्टील के बर्तन और डायमंड (हीरा) की खरीदारी को विशेष फलदायी माना जा रहा है।
पंचांग गणना के अनुसार, धनतेरस का पर्व शुक्रवार, 6 नवंबर को श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है:
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 6 नवंबर, सुबह 10:30 बजे
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर, सुबह 10:47 बजे
(चूंकि धनतेरस की शाम को प्रदोष काल में लक्ष्मी-कुबेर पूजन किया जाता है, इसलिए मुख्य पर्व 6 नवंबर को ही मान्य है।)
प्रदोष काल: शाम 05:33 बजे से रात 08:09 बजे तक
वृषभ काल (स्थिर लग्न): शाम 06:02 बजे से रात 07:57 बजे तक
पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त: शाम 06:02 बजे से रात 07:57 बजे तक (कुल अवधि: 1 घंटा 55 मिनट)
अभिजीत मुहूर्त (दिन की खरीदारी के लिए): सुबह 11:36 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक
पारंपरिक रूप से सोने और पीतल के साथ-साथ इस वर्ष चांदी, स्टील और हीरे की खरीदारी का विशेष ज्योतिषीय महत्व बताया गया है:
चांदी (चंद्रमा और शीतलता का प्रतीक):
चांदी को चंद्रमा और शुक्र ग्रह से संबंधित माना गया है। धनतेरस पर चांदी का सिक्का, बर्तन या आभूषण खरीदने से मन शांत रहता है, पारिवारिक कलह दूर होती है और घर में स्थायी लक्ष्मी का वास होता है।
स्टील और नए बर्तन (धन्वंतरि कलश की परंपरा):
समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। स्टील दैनिक जीवन में शुद्धता और मजबूती का प्रतीक है। हालांकि लोहे को सीधे खरीदने से बचा जाता है, लेकिन स्टील मिश्रित धातु (Alloy) होने और रसोई के अन्न भंडार को समृद्ध करने के कारण गृहस्थों के लिए बेहद शुभ माना गया है।
डायमंड/हीरा (शुक्र ग्रह की कृपा और वैभव):
ज्योतिष में हीरा धन, वैभव, ऐश्वर्य और आकर्षण के कारक ग्रह 'शुक्र' का रत्न है। शुक्रवार के दिन धनतेरस का संयोग बनने से हीरे या डायमंड ज्वेलरी की खरीदारी भौतिक सुख-साधनों और संपन्नता में चार चांद लगाने वाली मानी जा रही है।
क्या अवश्य खरीदें:
झाड़ू: माता लक्ष्मी की कृपा और घर से दरिद्रता को बाहर निकालने का प्रतीक।
साबुत धनिया: धनतेरस पर धनिया खरीदकर दिवाली की रात मां लक्ष्मी को अर्पित करने और बाद में गमले में बोने से बरकत बनी रहती है।
लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा: दीपावली पूजन के लिए मिट्टी या धातु की नई मूर्तियां।
वाहन व प्रॉपर्टी: शुभ चौघड़िया या अभिजीत मुहूर्त में नए वाहन व संपत्ति का सौदा करना फलदायी होता है।
किन चीजों से करें परहेज:
कांच या चीनी मिट्टी की वस्तुएं: कांच का संबंध राहु से माना जाता है, इसलिए इस दिन कांच के बर्तन या शोपीस खरीदने से बचें।
धारदार व नुकीली वस्तुएं: चाकू, कैंची, ब्लेड या लोहे की नुकीली चीजें खरीदना अशुभ माना जाता है।
काले रंग की वस्तुएं व खाली बर्तन: काले रंग के वस्त्र या सामान न खरीदें। साथ ही, जब भी कोई नया बर्तन घर लाएं, तो उसे खाली न रखें; उसमें थोड़ा सा अक्षत, मिठाई या जल डालकर ही गृह-प्रवेश कराएं।
धनतेरस की शाम प्रदोष काल में घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यमराज के निमित्त चौमुखा दीपक जलाया जाता है, जिसे 'यम दीपदान' कहते हैं। मान्यता है कि इससे परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु के भय से रक्षा होती है और आरोग्य का वरदान मिलता है।
संपादक, आज की दिल्ली







