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दीपावली पर रोशनी, रिश्तों और रौनक का संगम, ज्योतिषीय मान्यताओं के साथ सजेगा त्योहार

योगराज शर्मा5 मिनट में पढ़ें

दीपावली 2026: ज्योतिषीय मान्यताओं से लेकर बाजारों की रौनक तक, उत्सव की हर तैयारी खास

नई दिल्ली। रोशनी, उल्लास, पारिवारिक मेल-मिलाप और समृद्धि का प्रतीक दीपावली का पर्व इस वर्ष 8 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। त्योहार को लेकर घरों की सफाई, रंगोली, दीप सज्जा, मिठाइयों की खरीदारी और अपनों को उपहार देने की तैयारियां उत्सव के माहौल को खास बना रही हैं। दिल्ली के बाजारों में पारंपरिक खरीदारी के साथ आधुनिक सजावट, आकर्षक गिफ्ट पैकिंग और पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों की मांग भी त्योहार को नया रंग दे रही है।

दीपावली केवल दीप जलाने का पर्व नहीं, बल्कि परिवार को एक साथ लाने, रिश्तों में मिठास घोलने और नई शुरुआत का संदेश देने वाला अवसर भी है। धनतेरस से शुरू होने वाली उत्सवी खरीदारी में घर के बड़े-बुजुर्गों से लेकर बच्चों और युवाओं तक, सभी की अपनी पसंद और उत्साह देखने को मिलता है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार लक्ष्मी-गणेश पूजन

हिंदू परंपरा में दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी धन, वैभव और समृद्धि की प्रतीक हैं, जबकि भगवान गणेश को शुभारंभ, बुद्धि और विघ्नों के निवारण से जोड़ा जाता है। इस दिन श्रद्धालु घरों और प्रतिष्ठानों की सफाई कर पूजा स्थल सजाते हैं, दीपक जलाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग के अनुसार, 8 नवंबर को लक्ष्मी-गणेश पूजन का प्रमुख मुहूर्त शाम 5 बजकर 54 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक बताया गया है। हालांकि, अलग-अलग पंचांगों और स्थानीय गणना के अनुसार समय में अंतर हो सकता है, इसलिए पूजा करने से पहले स्थानीय पंचांग या योग्य ज्योतिषाचार्य से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

ज्योतिषीय मान्यताओं में पूजा के दौरान स्वच्छता, श्रद्धा, सकारात्मक विचार और सात्विक वातावरण को महत्व दिया जाता है। कई परिवार अपनी परंपराओं के अनुसार नए बही-खाते, व्यापारिक दस्तावेजों और धन-संपत्ति से जुड़ी वस्तुओं की पूजा भी करते हैं। इन धार्मिक परंपराओं का मूल भाव परिवार की खुशहाली, ईमानदारी और समृद्ध जीवन की कामना है।

पटाखों पर उत्साह के साथ नियमों का पालन भी जरूरी

दीपावली पर आतिशबाजी का आकर्षण बच्चों और युवाओं के बीच हमेशा बना रहता है, लेकिन दिल्ली की वायु गुणवत्ता को देखते हुए इस वर्ष पटाखों के मामले में विशेष सावधानी जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के 2 नवंबर 2026 को सामने आए निर्देशों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में 7 और 8 नवंबर को केवल स्वीकृत हरित पटाखे निर्धारित समय पर जलाने की अनुमति दी गई है। पटाखे सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक ही जलाए जा सकेंगे। अस्पतालों, नर्सिंग होम, वृद्धाश्रम और निर्धारित साइलेंस जोन सहित संबंधित प्रतिबंधित क्षेत्रों के 300 मीटर के दायरे में आतिशबाजी की अनुमति नहीं होगी। 9 नवंबर से पूर्ण प्रतिबंध फिर लागू होगा।

ऐसे में लोगों को पटाखे खरीदने से पहले उनकी प्रमाणिकता और लागू नियमों की जांच करनी चाहिए। बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें और ज्वलनशील वस्तुओं से दूरी बनाए रखें। परिवार चाहें तो दीपक, इलेक्ट्रिक लाइटिंग, सामूहिक दीप सज्जा और सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए भी त्योहार को यादगार बना सकते हैं।

मिठाइयों और उपहारों में परंपरा के साथ नए प्रयोग

दीपावली पर मिठाइयों का अपना अलग आकर्षण है। बाजारों में काजू कतली, बेसन के लड्डू, मोतीचूर, पेड़ा, बर्फी और पारंपरिक भारतीय मिठाइयों की खरीदारी त्योहार की तैयारियों का अहम हिस्सा रहती है। इसके साथ ड्राई फ्रूट्स के डिब्बे, प्रीमियम मिठाई बॉक्स, चॉकलेट हैम्पर्स और आकर्षक उपहार पैक भी लोगों की पसंद बन रहे हैं।

उपहारों के चयन में अब केवल कीमत ही नहीं, बल्कि उपयोगिता, प्रस्तुति और व्यक्तिगत पसंद पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सजावटी दीये, हस्तनिर्मित मोमबत्तियां, पौधे, घर की सजावट के सामान, पूजा की थालियां, स्थानीय कारीगरों के उत्पाद और व्यक्तिगत संदेश वाले गिफ्ट बॉक्स उपहार देने के लोकप्रिय विकल्प हैं। पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग और दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले सजावटी सामान की ओर बढ़ता रुझान भी त्योहार की खरीदारी को नया आयाम दे रहा है।

मिठाइयां खरीदते समय ग्राहकों को प्रतिष्ठित दुकानों का चयन करना चाहिए। पैक की गई मिठाइयों पर निर्माण और उपयोग की अंतिम तिथि, सामग्री तथा भंडारण संबंधी निर्देशों की जांच करना भी जरूरी है। उपहार में मिठाइयों के साथ परिवार के सदस्यों की पसंद को ध्यान में रखना रिश्तों में अपनापन बढ़ा सकता है।

दिल्ली के बाजारों में उमड़ रही खरीदारी की रौनक

दीपावली के अवसर पर दिल्ली के पारंपरिक बाजारों की चमक देखते ही बनती है। चांदनी चौक, सदर बाजार, करोल बाग, लाजपत नगर और सरोजिनी नगर जैसे प्रमुख खरीदारी क्षेत्रों में त्योहार के दौरान कपड़ों, सजावटी वस्तुओं, उपहारों और घरेलू सामान की खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। धनतेरस और दीपावली के करीब आते ही परिवारों की खरीदारी, दुकानों की साज-सज्जा और रोशनी से सजे बाजार उत्सव का माहौल तैयार करते हैं।

इस वर्ष दिल्ली-एनसीआर के दीपावली मेलों में हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुओं, आभूषणों, स्वतंत्र फैशन ब्रांडों, स्थानीय उत्पादों और क्षेत्रीय व्यंजनों जैसे विकल्प भी आकर्षण का केंद्र हैं। इससे ग्राहकों को पारंपरिक बाजारों के साथ नए डिजाइन और अलग-अलग बजट में खरीदारी के अवसर मिल रहे हैं।

कई परिवार त्योहार की खरीदारी को एक साथ समय बिताने का अवसर भी मानते हैं। बच्चे रंगीन लाइटें, खिलौने और सजावटी सामान पसंद करते हैं, जबकि बड़े सदस्य पूजा सामग्री, मिठाइयां, कपड़े और घर की जरूरतों की खरीदारी करते हैं। बाजारों की भीड़ और यातायात को देखते हुए खरीदारी की सूची पहले से तैयार करना, समय लेकर निकलना और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना सुविधाजनक हो सकता है।

परिवार के साथ उत्सव, खुशियों का असली संदेश

दीपावली का सबसे सुंदर पक्ष परिवार और समाज के साथ खुशियां साझा करना है। घरों में रंगोली बनाना, बच्चों के साथ दीप सजाना, बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना, जरूरतमंदों की सहायता करना और पड़ोसियों के साथ मिठाइयां बांटना त्योहार के मूल भाव को जीवंत बनाता है।

बदलते समय के साथ दीपावली मनाने के तरीके भले ही आधुनिक हो रहे हों, लेकिन प्रकाश, प्रेम, सद्भाव और सकारात्मकता का संदेश आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जिम्मेदार खरीदारी, सुरक्षित उत्सव और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता के साथ मनाई गई दीपावली न केवल घरों को रोशन करेगी, बल्कि समाज में भी खुशियों और अपनत्व की रोशनी फैलाएगी।

इस दीपावली का संदेश स्पष्ट है—परंपराओं का सम्मान, रिश्तों में मिठास, खरीदारी में समझदारी और उत्सव में जिम्मेदारी ही खुशहाल दीपावली की पहचान है।

योगराज शर्मा

संपादक, आज की दिल्ली

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