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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, भारत की समुद्री जिम्‍मेदारियां केवल अपनी सीमाओं तक सीमित नहीं

योगराज शर्मा2 मिनट में पढ़ें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, भारत की समुद्री जिम्‍मेदारियां केवल अपनी सीमाओं तक सीमित नहीं

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 से 2030 के दौरान देश के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में 22 हजार करोड़ के निवेश की संभावना है। श्री जोशी ने भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन-2026 के दौरान कनाडा पेंशन योजना निवेश बोर्ड के वरिष्ठ प्रबंध निदेशक और रियल एसेट्स के वैश्विक प्रमुख मैक्सिमिलियन बियागोश के साथ बैठक की।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि हिन्‍द-प्रशांत का भविष्‍य केवल प्रौद्योगिकी के माध्‍यम से तय नहीं होगा, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करेगा की देश उस प्रौद्योगिकी का उपयोग कितनी सूझबूझ से करते हैं। साथ ही यह इस बात पर भी निर्भर करेगा की वे आपसी साझेदारी को कितना मजबूत बनाते हैं और विभिन्न देशों के बीच कितना विश्वास कायम करते हैं। उन्‍होंने कहा कि भारत इस सामूहिक प्रयास में योगदान देने के लिए तैयार है।

नई दिल्‍ली में हिन्‍द-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद के एक सत्र को सम्‍बोधित करते हुए श्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत की समुद्री जिम्‍मेदारियां केवल अपनी राष्‍ट्रीय समुद्री सीमाओं तक सीमित नहीं है। उन्‍होंने कहा कि भारत ने हमेशा खुले, समावेशी और नियम आधारित समुद्री व्‍यवस्‍था का समर्थन किया है। श्री सिंह ने कहा कि विकसित भारत 2047 की दिशा में आगे बढ़ने के साथ देश के कायाकल्‍प में समुद्री क्षेत्र की महत्‍वपूर्ण भूमिका होगी। उन्‍होंने कहा कि देश की आकांक्षाएं केवल व्‍यापार का विस्‍तार करने या नौसेना क्षमताओं को मजबूत करने तक सीमित नहीं है बल्कि यह एक समग्र समुद्री तंत्र विकसित करने पर केंद्रित है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार सागरमाला पहल के जरिये बंदरगाह बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी में निवेश कर रही है। उन्‍होंने कहा कि सरकार अधिक कुशल और सतत बंदरगाहों की दिशा में काम कर रही है। साथ ही तटीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और समुद्री उद्योगों के आधार को मजबूत करने पर भी काम किया जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण महासागर पहल यानी क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी और समग्र प्रगति में भी दिखाई देता है। उन्‍होंने कहा कि भारत यह मानता है कि देशों की सुरक्षा और समृद्धि आपस में जुडी हुई हैं तथा हिन्‍द-प्रशांत का समुद्री भविष्‍य केवल एक देश अकेले तय नहीं कर सकता। उन्‍होंने अनुसंधान, शिक्षा और नवाचार तथा क्षमता निर्माण में सहयोग को बढ़ावा देने की जरूरत पर बल दिया। रक्षा मंत्री ने कहा कि एक देश की मजबूत वैज्ञानिक क्षमता समूचे क्षेत्र की सुरक्षा और समृद्धि में योगदान दे सकती है।

पर्यावरण मुद्दों पर जोर देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलने चाहिए। उन्‍होंने कहा कि महासागरों को संसाधनों के असीमित स्रोत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

योगराज शर्मा

संपादक, आज की दिल्ली

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