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रक्षा सुधार, आत्मनिर्भरता, सहयोग और निर्यात मिलकर देश के रक्षा क्षेत्र में बदलाव की दिशा तय कर रहे हैं: राजनाथ सिंह

योगराज शर्मा1 मिनट में पढ़ें
रक्षा सुधार, आत्मनिर्भरता, सहयोग और निर्यात मिलकर देश के रक्षा क्षेत्र में बदलाव की दिशा तय कर रहे हैं: राजनाथ सिंह

नई दिल्ली में दिल्ली रक्षा संवाद के तीसरे संस्करण को संबोधित करते हुए श्री सिंह ने कहा कि रक्षा सुधार, आत्मनिर्भरता, सहयोग और निर्यात मिलकर देश के रक्षा क्षेत्र में बदलाव की दिशा तय कर रहे हैं।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि दुनिया भर में मौजूदा संघर्षों ने युद्ध के स्वरूप को बदल दिया है। अब युद्ध सिर्फ जमीन, समुद्र और हवा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा अंतरिक्ष, साइबर और डिजिटल क्षेत्र तक फैल गया है।

नई दिल्ली में दिल्ली रक्षा संवाद के तीसरे संस्करण को संबोधित करते हुए श्री सिंह ने कहा कि रक्षा सुधार, आत्मनिर्भरता, सहयोग और निर्यात मिलकर देश के रक्षा क्षेत्र में बदलाव की दिशा तय कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि भारत का रक्षा निर्यात वर्ष 2013-14 में लगभग 686 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 38 हजार 424 करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रक्षा उत्पादों की बढ़ती मांग को दर्शाती है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में सैन्य तैयारियों को तकनीकी और औद्योगिक तैयारियों से अलग नहीं रखा जा सकता। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में सरकार ने कई सुधारों के माध्यम से देश के रक्षा उद्योग को मजबूत किया है।

उन्होंने कहा कि घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए रक्षा औद्योगिक गलियारे स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही उन्नत रक्षा उपकरणों और प्रणालियों के विकास तथा निर्माण में निजी उद्योगों की भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

योगराज शर्मा

संपादक, आज की दिल्ली

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