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नई दिल्ली। दीपावली से पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बार फिर गंभीर चिंता का विषय बन गया है। सर्दियों की शुरुआत, गिरता तापमान, हवा की कम गति और वातावरण में प्रदूषकों के जमाव के कारण दिल्ली की हवा लगातार खराब हो रही है। त्योहार के दौरान बढ़ने वाली आतिशबाजी, वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण स्थलों की धूल, कचरा जलाने और औद्योगिक उत्सर्जन जैसी गतिविधियां स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना सकती हैं। ऐसे में दिल्ली सरकार, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और संबंधित एजेंसियों ने प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए निगरानी और प्रतिबंधों को सख्त किया है।
2 नवंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 300 के पार पहुंचने के बाद ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण लागू किया गया। दिल्ली का AQI शाम छह बजे 327 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। यह स्थिति बताती है कि दिवाली से पहले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाना जरूरी है।
सर्दियों में क्यों बढ़ता है दिल्ली का प्रदूषण?
दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण एक साथ काम करते हैं। कम तापमान और शांत हवाओं के कारण प्रदूषक वातावरण में लंबे समय तक बने रह सकते हैं। वाहनों से निकलने वाले सूक्ष्म कण और गैसें, निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन तथा खुले में कचरा जलाना स्थानीय प्रदूषण को बढ़ाते हैं। उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में पराली जलाने से आने वाला धुआं भी मौसम की परिस्थितियों के अनुसार दिल्ली-एनसीआर की हवा को प्रभावित कर सकता है।
दीपावली के आसपास आतिशबाजी से प्रदूषण का अतिरिक्त दबाव पैदा होने की आशंका रहती है। ऐसे में केवल त्योहार के दिन कदम उठाना पर्याप्त नहीं है। वाहनों, निर्माण कार्यों, सड़कों की धूल और कचरा जलाने जैसी गतिविधियों पर पूरे शीतकालीन मौसम में प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है।
दिल्ली सरकार का विंटर एक्शन प्लान: 1 नवंबर से 28 फरवरी तक विशेष व्यवस्था
दिल्ली सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाया है। सरकार की घोषित योजना के अनुसार, प्रत्येक वर्ष 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू रहने वाला स्थायी विंटर पॉल्यूशन मास्टर प्लान विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, वाहनों पर नियंत्रण, निर्माण स्थलों की निगरानी और धूल कम करने के उपायों को एकीकृत करता है। इसमें CAQM के संशोधित GRAP दिशा-निर्देशों और न्यायालयों के निर्देशों को भी शामिल किया गया है।
1. प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्ती
वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए कई अहम प्रावधान घोषित किए गए हैं।
PUC के बिना ईंधन नहीं: वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC/PUC) के बिना वाहनों को ईंधन देने पर रोक संबंधी व्यवस्था लागू की गई है। दिल्ली में संबंधित ईंधन केंद्रों पर वाहन मालिकों के प्रमाणपत्र की जांच की जा सकती है।
बाहरी राज्यों के गैर-BS-VI वाहन: 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत BS-VI से कम उत्सर्जन मानक वाले पेट्रोल और डीजल वाहनों के प्रवेश पर रोक लागू की गई है। CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों सहित अधिसूचना में निर्दिष्ट श्रेणियों को छूट दी गई है।
पुराने और निर्धारित आयु-सीमा पार वाहन: निर्धारित आयु-सीमा पार कर चुके वाहनों के विरुद्ध लागू नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, सभी पुराने वाहनों पर एक समान प्रतिबंध मानना सही नहीं होगा; वाहन का प्रकार, ईंधन, पंजीकरण और उस समय लागू न्यायिक आदेश महत्वपूर्ण हैं।
नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई: परिवहन विभाग और यातायात पुलिस के माध्यम से वाहन जांच, उत्सर्जन संबंधी अनुपालन और लागू प्रतिबंधों को लागू किया जाएगा।
इन उपायों का उद्देश्य अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के उपयोग को कम करना और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है। वाहन चालकों को यात्रा से पहले अपना PUC प्रमाणपत्र, पंजीकरण और लागू उत्सर्जन मानक जांच लेना चाहिए।
2. निर्माण कार्यों और तोड़फोड़ पर प्रतिबंध
दिल्ली में सर्दियों के दौरान निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन जाती है। इसे नियंत्रित करने के लिए विंटर एक्शन प्लान में समयबद्ध प्रतिबंधों और निगरानी के प्रावधान किए गए हैं।
1 नवंबर से 31 जनवरी: धूल पैदा करने वाली तोड़फोड़ और खुले में होने वाले सिविल निर्माण कार्यों पर रोक का प्रावधान है। आवश्यक सार्वजनिक अवसंरचना परियोजनाओं के लिए लागू छूट और शर्तें संबंधित आदेशों के अनुसार निर्धारित होंगी।
10 दिसंबर से 20 जनवरी: घोषित योजना के अनुसार निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर अधिक व्यापक प्रतिबंध की व्यवस्था है।
निर्माण स्थलों की निगरानी: प्रमुख निर्माण स्थलों पर CCTV, निरीक्षण और तकनीकी निगरानी को मजबूत करने की योजना है। भवन योजना की मंजूरी के लिए मलबा प्रबंधन से जुड़ी निर्धारित प्रक्रिया का पालन भी आवश्यक किया गया है।
धूल नियंत्रण उपकरण: बड़े व्यावसायिक भवनों और प्रमुख निर्माण स्थलों पर आवश्यकतानुसार एंटी-स्मॉग गन या मिस्ट सिस्टम लगाने तथा धूल को फैलने से रोकने के उपाय करने का प्रावधान है।
मलबे का सुरक्षित निस्तारण: निर्माण मलबे को सड़क या खाली प्लॉट पर डालने के बजाय निर्धारित व्यवस्था के माध्यम से हटाना जरूरी है।
निर्माण संबंधी प्रतिबंधों की सटीक सीमा, छूट और लागू अवधि संबंधित अधिसूचना से तय होगी। इसलिए ठेकेदारों और परियोजना संचालकों को काम जारी रखने से पहले नवीनतम सरकारी आदेशों की जांच करनी चाहिए।
3. GRAP के तहत चरणबद्ध कार्रवाई
ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी GRAP दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता बिगड़ने पर लागू होने वाली चरणबद्ध व्यवस्था है। इसके अंतर्गत प्रदूषण की गंभीरता के अनुसार अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जाते हैं।
चरण-1 — खराब हवा: धूल नियंत्रण, सड़कों की सफाई, निर्माण स्थलों के निरीक्षण और खुले में कचरा जलाने पर रोक के प्रवर्तन जैसे कदम।
चरण-2 — बहुत खराब हवा: सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा, अधिक पार्किंग शुल्क, कोयले और लकड़ी के उपयोग पर संबंधित प्रतिबंध तथा डीजल जनरेटरों पर कड़ी निगरानी जैसे उपाय।
चरण-3 — गंभीर हवा: निर्माण गतिविधियों पर अतिरिक्त प्रतिबंध और वाहनों पर सख्त कार्रवाई सहित लागू GRAP आदेशों के अनुरूप कदम।
चरण-4 — गंभीर से भी खराब स्थिति: सबसे कड़े आपातकालीन उपाय, जिनमें वाहन आवागमन, निर्माण और शैक्षणिक या अन्य गतिविधियों पर अतिरिक्त पाबंदियां शामिल हो सकती हैं।
2 नवंबर 2026 को दिल्ली-एनसीआर में GRAP का चरण-2 लागू होने की रिपोर्ट आई थी। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर चरण में लागू सभी प्रतिबंध अपने आप लागू हो जाते हैं। किसी भी समय लागू पाबंदियां CAQM के नवीनतम आदेश और संबंधित सरकारी अधिसूचनाओं से निर्धारित होती हैं।
4. पार्किंग शुल्क, सार्वजनिक परिवहन और वर्क फ्रॉम होम
निजी वाहनों के उपयोग और यातायात जाम से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए सरकार ने कई कदम घोषित किए हैं।
1 नवंबर से 28 फरवरी तक अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क बढ़ाने की व्यवस्था घोषित की गई है। दिल्ली मेट्रो की पार्किंग को इस व्यवस्था से छूट दी गई है।
सरकार ने सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम अथवा सप्ताह में दो दिन घर से काम करने की व्यवस्था घोषित की है। इसके क्रियान्वयन की शर्तें संबंधित आदेशों पर निर्भर होंगी।
कार्यालयों के समय में अंतर रखने का उद्देश्य सुबह और शाम के व्यस्त समय में यातायात का दबाव घटाना है।
दिल्ली मेट्रो, DTC बसों, इलेक्ट्रिक बसों और अंतिम छोर तक सार्वजनिक परिवहन की सुविधा को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
इन उपायों का प्रभाव तभी अधिक होगा जब लोग निजी वाहन की जगह मेट्रो, बस, कारपूल और अन्य कम-उत्सर्जन वाले विकल्पों का इस्तेमाल करेंगे।
5. सड़कों की धूल, कचरा जलाने और औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण
वाहनों और निर्माण कार्यों के अलावा सड़कों की धूल तथा खुले में कचरा जलाना भी प्रदूषण बढ़ाते हैं। इसलिए सरकार ने यांत्रिक सड़क सफाई, पानी का छिड़काव, धूल नियंत्रक पदार्थों के उपयोग और संवेदनशील क्षेत्रों में निरीक्षण बढ़ाने पर जोर दिया है।
खुले में पत्तियां, प्लास्टिक, घरेलू कचरा या अन्य अपशिष्ट जलाना प्रतिबंधित गतिविधि है। उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित नियमों के अनुसार कार्रवाई हो सकती है। औद्योगिक इकाइयों को निर्धारित उत्सर्जन मानकों का पालन करना होगा और नियम तोड़ने वाली इकाइयों के विरुद्ध बंदी या अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
दिल्ली सरकार ने प्रमुख प्रदूषण और यातायात वाले हॉटस्पॉट पर निगरानी तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को भी अपने शीतकालीन अभियान का हिस्सा बनाया है।
न्यायालयों और CAQM के दिशा-निर्देशों की भूमिका
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए सर्वोच्च न्यायालय, अन्य सक्षम न्यायिक मंचों, CAQM और पर्यावरण संबंधी सरकारी एजेंसियों के निर्देश महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। GRAP की व्यवस्था भी न्यायिक निर्देशों और प्रदूषण नियंत्रण की आवश्यकता के संदर्भ में विकसित हुई है।
न्यायालयों के निर्देशों का उद्देश्य केवल अस्थायी प्रतिबंध लगाना नहीं, बल्कि संबंधित सरकारी एजेंसियों को प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए जवाबदेह बनाना भी है। निर्माण गतिविधियों पर नियंत्रण, वाहन उत्सर्जन संबंधी नियमों का पालन, कचरा जलाने की रोकथाम और पटाखों से जुड़े प्रतिबंध इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं।
पटाखों के संबंध में दिल्ली में लागू निषेधाज्ञाओं और सर्वोच्च न्यायालय के नवीनतम आदेशों को विशेष रूप से ध्यान में रखना चाहिए। दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग की अधिसूचना सूची में पटाखों के निर्माण, बिक्री और उपयोग से संबंधित आदेशों के साथ 15 अक्टूबर 2025 का सर्वोच्च न्यायालय का आदेश भी दर्ज है। किसी विशेष दिन या अवधि में छूट लागू है या नहीं, इसकी पुष्टि नवीनतम न्यायिक आदेश और प्रशासनिक अधिसूचना से करना आवश्यक है।
नागरिकों की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण
सरकार के नियमों के साथ नागरिकों का सहयोग भी प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी है। वाहन चालकों को वैध PUC प्रमाणपत्र रखना चाहिए, गैर-अनुपालन वाले वाहनों के लिए लागू प्रतिबंधों का पालन करना चाहिए और छोटी दूरी के लिए निजी वाहन की जगह सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देनी चाहिए।
निर्माण संचालकों को धूल रोकने, मलबा ढककर ले जाने और निर्धारित स्थान पर उसका निस्तारण करने जैसे उपाय करने चाहिए। बाजारों, आवासीय कॉलोनियों और संस्थानों को खुले में कचरा जलाने से बचना चाहिए। नागरिक अपने आसपास प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों की सूचना संबंधित स्थानीय निकाय या प्रदूषण नियंत्रण एजेंसी को दे सकते हैं।
निष्कर्ष: साफ हवा के लिए निरंतर कार्रवाई जरूरी
दीपावली खुशियों, रोशनी और मेल-मिलाप का पर्व है, लेकिन दिल्ली में बढ़ता स्मॉग स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर नियंत्रण, निर्माण स्थलों की धूल कम करना, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना, कचरा जलाने पर रोक और नियमों का प्रभावी प्रवर्तन इस चुनौती से निपटने के लिए आवश्यक हैं।
दिल्ली की हवा में सुधार केवल कुछ दिनों के प्रतिबंधों से संभव नहीं होगा। इसके लिए सरकार, उद्योग, निर्माण क्षेत्र और नागरिकों को मिलकर लगातार काम करना होगा। त्योहार की खुशियां तभी पूरी होंगी, जब राजधानी के लोग स्वच्छ हवा में सांस ले सकें और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सके।
विषय
संपादक, आज की दिल्ली







