
अक्टूबर में जीएसटी कलेक्शन में 23% का बंपर उछाल; आंकड़ा ₹2.31 लाख करोड़ के पार, वसूली में महाराष्ट्र रहा अव्वल
बिजनेस डेस्क | नई दिल्ल त्योहारी मांग और घरेलू खपत में आई जोरदार तेजी के दम पर अक्टूबर महीने में वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह ने नए रिकॉर्ड स्तर को छू लिया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में कुल ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन सालाना आधार पर करीब 23 प्रतिशत (22.9%) बढ़कर ₹2.31 लाख करोड़ के पार पहुंच गया। राज्यों की रैंकिंग में घरेलू टैक्स वसूली के मामले में महाराष्ट्र शीर्ष पर बरकरार है।
जीएसटी आंकड़ों की मुख्य झलकियाँ
कुल ग्रॉस कलेक्शन: ₹2.31 लाख करोड़ (पिछले साल समान अवधि के मुकाबले 22.9% की वृद्धि)।
नेट जीएसटी कलेक्शन: रिफंड्स के समायोजन के बाद शुद्ध (Net) जीएसटी राजस्व 25.6% बढ़कर ₹2.03 लाख करोड़ दर्ज किया गया।
रिफंड वितरण: महीने के दौरान कुल ₹27,934 करोड़ के जीएसटी रिफंड जारी किए गए, जो पिछले साल से 6.5% अधिक हैं।
अप्रैल-अक्टूबर कुल संग्रह: चालू वित्त वर्ष के पहले 7 महीनों में संचयी ग्रॉस कलेक्शन 13.2% की बढ़त के साथ ₹14.78 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
टैक्स घटकों का विभाजन (Revenue Breakdown)
मद (Category)राशि (करोड़ रुपये में)मुख्य विवरणCGST (केंद्रीय जीएसटी)₹42,935 करोड़केंद्र सरकार का प्रत्यक्ष हिस्साSGST (राज्य जीएसटी)₹51,340 करोड़राज्यों का प्रत्यक्ष राजस्व हिस्साIGST (एकीकृत जीएसटी)₹1.37 लाख करोड़अंतर-राज्यीय व्यापार व आयातित मालआयात से राजस्व (Imports)₹72,246 करोड़आयात शुल्क व टैक्स (42.2% की भारी वृद्धि)घरेलू लेन-देन (Domestic)₹1.59 लाख करोड़घरेलू कारोबार से राजस्व (15.8% की बढ़ोतरी)
राज्यों का प्रदर्शन: महाराष्ट्र अव्वल, कर्नाटक-गुजरात भी आगे
महाराष्ट्र: ₹35,150 करोड़ के घरेलू जीएसटी संग्रह के साथ पहले पायदान पर रहा (सालाना वृद्धि 13%)।
कर्नाटक: ₹15,922 करोड़ का राजस्व दर्ज कर दूसरे स्थान पर रहा (18% की वृद्धि)।
गुजरात: ₹13,516 करोड़ के कलेक्शन के साथ तीसरे स्थान पर (16% की वृद्धि)।
हरियाणा: ₹11,529 करोड़ के साथ मजबूत प्रदर्शन (17% की वृद्धि)।
अन्य बड़े राज्य: उत्तर प्रदेश और बिहार दोनों ने 24-24 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि दर्ज की, जबकि असम ने 47% की शानदार छलांग के साथ ₹1,934 करोड़ जुटाए।
उछाल के प्रमुख कारण
त्योहारी खरीदारी: धनतेरस, दिवाली और छठ पूजा के मद्देनजर ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रियल एस्टेट और रिटेल सेक्टर में भारी मांग रही।
आयात में तेजी: आयातित वस्तुओं से मिलने वाले आईजीएसटी राजस्व में 42.2% का उछाल देखा गया, जिसने कुल संग्रह को बड़ा सहारा दिया।
सख्त टैक्स अनुपालन: टैक्स चोरी पर लगाम, ई-इनवॉइसिंग और डिजिटल निगरानी तंत्र के विस्तार से कर आधार में विस्तार हुआ है।
संपादक, आज की दिल्ली
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