
रजिस्ट्री के 10 दिन बाद बेचा फ्लैट, फिर भी मिला LTCG का फायदा; ITAT के इस फैसले से प्रॉपर्टी खरीदारों को बड़ी राहत
बिजनेस डेस्क | नई दिल्ली ; प्रॉपर्टी खरीद-फरोख्त से जुड़े इनकम टैक्स मामलों में इनकम टैक्स अपीलीय ट्रिब्यूनल (ITAT) का एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। सूरत ट्रिब्यूनल ने एक एनआरआई (NRI) के मामले में स्पष्ट किया है कि फ्लैट की औपचारिक रजिस्ट्री की तारीख भले ही बिक्री से कुछ ही दिन पहले की हो, लेकिन यदि प्रॉपर्टी का अलॉटमेंट पहले हुआ है, तो होल्डिंग पीरियड की गणना अलॉटमेंट लेटर की तारीख से ही की जाएगी। इस फैसले से करदाताओं को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) के बजाय लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) का लाभ मिल सकेगा।
पूरा मामला क्या था?
अलॉटमेंट और रजिस्ट्री: जगदीशकुमार छोटुभाई गांधी नामक एनआरआई ने एक बिल्डर से जनवरी 2011 में फ्लैट का अलॉटमेंट लेटर प्राप्त किया था और इसके अधिकांश भुगतान बैंकिंग चैनलों के माध्यम से उसी दौरान कर दिए थे। हालांकि, इस फ्लैट की औपचारिक कनवेयंस डीड (रजिस्ट्री) 30 सितंबर 2016 को हुई।
तुरंत बिक्री: रजिस्ट्री होने के महज 10 दिन बाद यानी 10 अक्टूबर 2016 को उन्होंने इस फ्लैट को 2.78 करोड़ रुपये में बेच दिया।
टैक्स विभाग की आपत्ति: इनकम टैक्स विभाग ने तर्क दिया कि चूंकि फ्लैट की रजिस्ट्री 30 सितंबर 2016 को हुई और 10 दिन बाद ही उसे बेच दिया गया, इसलिए यह शॉर्ट टर्म कैपिटल एसेट (STCG) है। विभाग ने बिक्री से हुए करीब 68.12 लाख रुपये के मुनाफे पर शॉर्ट टर्म टैक्स लगा दिया। इसके अलावा स्टांप ड्यूटी वैल्यू को लेकर भी अंतर पर टैक्स जोड़ दिया गया, जिससे करदाता की कुल कर योग्य आय बढ़कर 1.28 करोड़ रुपये हो गई थी।
ITAT का फैसला और राहत के आधार
मामले की सुनवाई करते हुए सूरत ITAT ने करदाता के पक्ष को सही ठहराया और निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर राहत दी:
अलॉटमेंट की तारीख अहम: ट्रिब्यूनल ने माना कि खरीदार को अलॉटमेंट लेटर मिलने के साथ ही उस विशिष्ट संपत्ति पर कानूनी और वैध अधिकार मिल जाते हैं। इसलिए, होल्डिंग पीरियड की गणना रजिस्ट्री की तारीख से न होकर अलॉटमेंट लेटर (जनवरी 2011) की तारीख से की जाएगी।
LTCG का लाभ: जनवरी 2011 से अक्टूबर 2016 के बीच की अवधि 36 महीनों से काफी अधिक थी, जिसके चलते यह संपत्ति 'लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट' की श्रेणी में आ गई। अदालत ने टैक्स अधिकारी को निर्देश दिया कि इस मुनाफे को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) माना जाए और नियमानुसार इंडेक्सेशन व अन्य टैक्स छूटों का लाभ दिया जाए।
स्टांप ड्यूटी विवाद पर पुनर्विचार: हालांकि, स्टांप ड्यूटी वैल्यू के अंतर से जुड़े करीब 45.79 लाख रुपये के दूसरे विवाद पर ट्रिब्यूनल ने पूरे टैक्स को रद्द न करते हुए मामले को दोबारा जांच के लिए टैक्स अधिकारी (AO) के पास भेज दिया है। अधिकारी को अलॉटमेंट के समय लागू स्टांप ड्यूटी वैल्यू के आधार पर दोबारा गणना करने को कहा गया है।
प्रॉपर्टी खरीदारों के लिए सीख
यह फैसला उन सभी होमबॉयर्स और निवेशकों के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है जो अंडर-कॉन्ट्रक्चर प्रॉपर्टी खरीदते हैं और जिनकी रजिस्ट्री मिलने में कई साल की देरी हो जाती है। यह आदेश स्पष्ट करता है कि टैक्स गणना के लिहाज से 'अधिग्रहण की तिथि' (Date of Acquisition) केवल रजिस्ट्री की तारीख नहीं, बल्कि अलॉटमेंट लेटर मिलने की तारीख भी हो सकती है, बशर्ते अलॉटमेंट के समय वैध शर्तें और भुगतान पूरे किए गए हों।
संपादक, आज की दिल्ली
संबंधित समाचार

अक्टूबर में जीएसटी कलेक्शन में 23% का बंपर उछाल; आंकड़ा ₹2.31 लाख करोड़ के पार, वसूली में महाराष्ट्र रहा अव्वल

भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन B28 ने पास किया 'स्क्वीज टेस्ट'; 250 किमी/घंटा की रफ्तार से पटरियों पर दौड़ेगी

