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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मीडिया की खबरों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए दो सप्ताह के भीतर मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश के एक निजी स्कूल में मालिक के भाई द्वारा दो शिक्षिकाओं के कथित यौन शोषण के मामले में अलीगढ़ के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किए हैं। आयोग ने मीडिया की खबरों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए दो सप्ताह के भीतर मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने कहा है कि यदि खबर में दी गई जानकारी सही है, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित शिक्षिकाओं की शिकायतों पर स्कूल प्रबंधन ने कोई कार्रवाई नहीं की है। इसके बाद शिक्षिकाओं ने कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से संपर्क किया है।
आयोग ने उत्तर प्रदेश के बलिया में स्कूल की छत के पास से गुजर रही बिजली की तार की चपेट में आने से एक छात्र की कथित मौत के मामले में भी स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, बलिया के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल के दो शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है और शिक्षा मित्र की सेवाएं समाप्त करने की सिफारिश की गई है।
आयोग ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में इस वर्ष सात महीने के दौरान गर्भावस्था के इलाज या प्रसव के समय 24 महिलाओं की कथित मौत के मामलों पर भी स्वतः संज्ञान लिया है।आयोग ने उत्तर प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव तथा गाजियाबाद के जिलाधिकारी को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जिले में तीन हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं की पहचान उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के मामलों के रूप में की गई है।
स्रोत: प्रसार भारती (पीबी-शब्द)
संपादक, आज की दिल्ली







