सबसे सस्ता होम लोन: भारत के शीर्ष 10 बैंक जो दे रहे हैं न्यूनतम ब्याज दर पर कर्ज

दीपावली के पर्व पर स्थानीय सामग्री से तैयार किए जाने वाले भैले पहाड़ की दीपावली की अनूठी पहचान हैं।
दीपावली के पर्व पर स्थानीय सामग्री से तैयार किए जाने वाले भैले पहाड़ की दीपावली की अनूठी पहचान हैं।
05 नवम्बर 2026, टिहरी गढ़वाल: दीपावली के पर्व पर स्थानीय सामग्री से तैयार किए जाने वाले भैले पहाड़ की दीपावली की अनूठी पहचान हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भैलो के बिना दीपावली का उत्सव अधूरा माना जाता है। टिहरी गढ़वाल जिले में भैलो की भी खूब मांग बाजारों में देखने को मिल रही है। चंबा-ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग सहित विभिन्न बाजारों में सड़क किनारे दुकानों, ढाबों और फल-सब्जी की दुकानों पर बड़ी संख्या में भैलों को बिक्री के लिए सजाया गया है।
दरअसल, गढ़वाल की लोक संस्कृति में भैलो का विशेष महत्व है। चीड़ के पेड़ से निकलने वाली विशेष लकड़ी जिसे स्थानीय भाषा में दली और भैंस लगले,जैसी स्थानीय सामग्री से तैयार किए जाने वाले भैले पहाड़ की दीपावली की अनूठी पहचान हैं। परंपरा के अनुसार दीपावली की पूजा-अर्चना के बाद भैलों के दोनों सिरों पर आग जलाकर इन्हें शरीर के चारों ओर घुमाया जाता है।
खास बात यह है कि भैलो अब स्थानीय लोगों के लिए स्वरोजगार का माध्यम भी बन गए हैं। जो इस बात का संकेत हैं कि आधुनिकता के दौर में भी पहाड़ की लोक परंपराओं के प्रति लोगों का लगाव बना हुआ है।
स्रोत: प्रसार भारती (पीबी-शब्द)
संपादक, आज की दिल्ली







