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महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ (गोकुल मिल्क यूनियन) के अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर राज्य की राजनीति में बड़ा घमासान छिड़ गया है। कांग्रेस द्वारा बहुमत हासिल करने के बाद महाराष्ट्र सरकार द्वारा सहकारी नियमों में बदलाव कर मनोनीत निदेशकों को मतदान का अधिकार देने के फैसले पर विवाद गहरा गया है। इस पूरे मामले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के तीखे हमले के बाद अब पार्टी ने पूर्व सीजेआई (CJI) बी.आर. गवई की कानूनी राय सार्वजनिक की है।
कांग्रेस द्वारा साझा की गई कानूनी राय के अनुसार, पूर्व सीजेआई बी.आर. गवई ने स्पष्ट किया है कि:
कानूनी तौर पर टिक नहीं पाएगा अध्यादेश: यदि राज्य सरकार धारा 73AAA और 27(9) में संशोधन के लिए अध्यादेश लाकर सरकार द्वारा नामित और विशेषज्ञ निदेशकों को चुनाव में वोटिंग अधिकार देने की कोशिश करती है, तो यह कदम कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं होगा।
मनमानी और शक्तियों का दुरुपयोग: ऐसा संशोधन 'स्पष्ट मनमानी' (Manifest Arbitrariness) के दायरे में आएगा और इसे शक्तियों का अनुचित या छद्म इस्तेमाल (Colorable Exercise of Power) माना जाएगा।
न्याय प्रक्रिया में हस्तक्षेप: चूंकि यह मामला पहले से ही अदालत के समक्ष विचाराधीन है, ऐसे समय में अध्यादेश लाना न्यायिक निर्देशों को निष्प्रभावी करने और न्याय प्रशासन में सीधा हस्तक्षेप करने जैसा होगा।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर महायुति सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा कि गोकुल में दूध उत्पादकों ने भाजपा गठबंधन को हरा दिया, लेकिन सत्ता बचाने के लिए चुनाव के बाद नियम बदले जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 4 अतिरिक्त सरकारी डायरेक्टरों के जरिए 12 के आंकड़े को 16 बनाकर बहुमत चुराने की कोशिश की जा रही है, जो किसानों और दूध उत्पादकों के जनादेश में सीधी मिलावट है।
चुनाव परिणाम: 19 अक्टूबर 2026 को गोकुल डेयरी के 25 निदेशक पदों के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस नेता सतेज (बंटी) पाटील के नेतृत्व वाले 'राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी आघाड़ी' पैनल ने 13 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया, जबकि सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन को 12 सीटें मिलीं।
कोरम का पेंच: 29 अक्टूबर को अध्यक्ष चुनाव के लिए 14 निदेशकों की अनिवार्य उपस्थिति (कोरम) चाहिए थी। कांग्रेस के पास 13 सदस्य होने के कारण महायुति के 12 सदस्य जानबूझकर अनुपस्थित रहे, जिससे बैठक स्थगित करनी पड़ी।
हाईकोर्ट का दखल: कांग्रेस के अदालत जाने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट की कोल्हापुर पीठ ने 10 नवंबर 2026 को दोबारा चुनाव कराने का निर्देश दिया और सभी 25 निदेशकों को उपस्थित रहने का नोटिस जारी किया।
कैबिनेट का संशोधन: 4 नवंबर 2026 को महाराष्ट्र कैबिनेट ने 'महाराष्ट्र सहकारी समिति अधिनियम, 1960' में संशोधन को मंजूरी दी, जिसके तहत ₹500 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाली सहकारी संस्थाओं में सरकार 5 निदेशक नामित कर सकती है, जिनमें से 4 को वोटिंग का अधिकार दिया गया। इससे महायुति का संख्याबल 12 से बढ़कर 16 होने की संभावना बन गई और विवाद सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच गया।
विषय
संपादक, आज की दिल्ली







