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वकीलों को कथित तौर पर धमकी देने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने निलंबित एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ ने मामले की तात्कालिकता को देखते हुए इसे शुक्रवार (6 नवंबर) को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
शुरुआत में वकीलों के एक समूह ने अदालत से इस मामले पर स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) लेने का आग्रह किया था, जिसे पीठ ने अस्वीकार करते हुए सभी साक्ष्यों के साथ विधिवत याचिका दाखिल करने को कहा। वकीलों का आरोप है कि पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान वकीलों के लिए "काले कोट के गुंडे" और "AK-47 का इस्तेमाल" जैसे आपत्तिजनक व धमकी भरे शब्दों का प्रयोग किया गया।
यह पूरा विवाद 23 अक्टूबर को शाहदरा थाने में एक झड़प के दौरान अधिवक्ता ललित बंसल के गंभीर रूप से घायल होने के बाद शुरू हुआ था। वकीलों के विरोध प्रदर्शन के बाद गृह मंत्रालय ने गांधी नगर के तत्कालीन एसडीपीओ एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया था, जबकि शाहदरा के तत्कालीन एसएचओ अरुण कुमार का तबादला कर दिया गया था।
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संपादक, आज की दिल्ली







